जानिए:- छठ पूजा क्यों किसलिए मनाया जाता है?

नमस्कार दोस्तो आपलोगो को पता है बिहार और उत्तर प्रदेश मे सबसे ज्यादा धूमधाम से छठ पर्व मनाया जाता है और अब तो संपूर्ण भारत मे लोग छठ पूजा करते है मनाते है, छट पूजा हिंदू धर्म के सभी जाती के लोग मनाते है और हिन्दू धर्म के सभी लोग छठ पूजा को सबसे बड़ा महापर्व भी मानते है! आप अगर हिंदू धर्म से है और आपके घर मे भी छठ पूजा वर्षो से मनाए जाते है यदि आपको पता नही है छठ पूजा क्यो किसलिए मनाया जाता है? तो संपूर्ण आर्टिकल जरूर पढे हम बात करेंगे आखिर छठ पूजा क्यों किसलिए मनाया जाता है ऐसे तो छठ पूजा की शुरुआत के विषय मे अनेकानेक इतिहास कहानिया सुनने को मिलेगी मगर हम सच्ची प्रचलित कहानी बता रहे है जो सत प्रतिशत सही है उसी समय से छठ पूजा की शुरुआत हुई तो चलिए शुरु करते है-

जानिए:- छट पूजा क्यों किसलिए मनाया जाता है?
जानिए:- छट पूजा क्यों किसलिए मनाया जाता है?




जानिए:- छठ पूजा क्यों किसलिए मनाया जाता है
पुराण के अनुसार छठ पूजा की संबंध राजा प्रियंवद से है, राजा प्रियंवद और रानी मालिनी के बीच एक भी संतान नही थी दूखी थे ये बांझपन की समस्या से निजात पाने के लिए महर्षि कश्यप से मदद मांगी महर्षि कश्यप ने यज्ञ करवाए और प्रसाद के रूप मे खीर रानी मालिनी को दिए तत्पश्चात एक एक पुत्र की प्राप्ती हुई मगर वो मरा हुआ जन्म लिया था। राजा प्रियंवद मरे हुए पुत्र को श्मशान ले गए राजा प्रियंवद पुत्र वियोग मे बहुत ही ज्यादा दूखी थे उन्होंने अपना प्राण भी श्मशान मे हि त्यागने का मन बना लिए उसी वक्त भगवान कि मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुई और राजा प्रियंवद को दूखी देखकर बोली मै सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हूं इसी कारण वो षष्ठी कहलातीं हैं, तुम मेरा पूजा करो और अन्य लोगो को भी मेरी पूजन करने को प्रेरित करो इस प्रकार राजा प्रियंवद को संतान की प्राप्ति हुई और ये देवसेना पुत्री षष्ठी पूजन को छठ पर्व की नाम दिया गया तब से ये प्रथा दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। पूराणो के अनुसार छट पूजा की शुरुआत कर्ण से भी जुड़ी हुई है कर्ण सुर्य पुत्र था और सुर्य देव की परम भक्त भी था रोज शाम-सवेरे नदी मे पानी मे घंटोभर खरे होकर सुर्य देव को जल अर्घ्य देता था आज भी छठ पर्व मे सुर्य देव का ही पूजा होता है और सुर्य देव को जल अर्घ्य दिया जाता है। पुरानो के अनुसार छठ पूजा सीताराम से भी जुड़ा हुआ है चौदह वर्ष वनवास से लौटने के पश्चात श्री राम ने रावण वध की पाप से मुक्त होने के लिए ऋषि-मुनियों के आदेशानुसार सुर्य यज्ञ करने के फैसला किये राज्य मे सुर्य देव का यज्ञ किया फिर मुग्दल ऋषि के द्वारा सीता को पवित्र करने के लिए गंगाजल का छिड़काव करवाया फिर सीता से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने को कहा गया जिसके पश्चात सीता ने मुग्दल ऋषि के आश्रम मे रहकर छह दिनो तक भगवान सुर्य देव की पूजन-अर्चना किया। 

दोस्तो छठ पर्व की शुरुआत कैसे हुई अनेकानेक कहानीया है आपको इतिहास जानने को मिलेगी परंतु जो प्रचलित वो हमने शेयर किया कैसी लगी जरूर कमेंट बाक्स मे बताना और भी फ्री मे इंटरनेट और कहानियो से संबंधित जानकारीया पाना चाहते है तो Primary Gyan को सब्सक्राइब जरूर करे और आर्टिकल अच्छी लगी हो तो निचे दिए गए शेयर बटन से अपने दोस्तो को शेयर जरूर करे धन्यवाद!

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